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कार्पोरेट दृष्टिकोण

परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए ठोस वित्तीय आधार के साथ-साथ विश्व निर्माण प्रक्रिया को अपनाकर अत्यधिक दक्ष रेल अवसंरचना प्रदाता कंपनी के रूप में उभरना।

रेल विकास निगम लिमिटेड का गठन निजी एवं बाजार निधियों को जुटाने तथा रेल परियोजनाओं को त्वरित आधार पर क्रियान्वित करने के उद्देश्य से किया गया था। रेविनिलि को एडीबी जैसी बहुपक्षीय एजेंसी के साथ कार्य करते हुए, उनकी प्रक्रियाओं तथा दिशानिर्देशों आदि को समझकर और बहुपक्षीय निधियों का रेल परियोजनाओं में उपयोग करके और महत्वपूर्ण योजनाओं एवं परियोजना प्रबंधन वाली बड़ी संविदाओं को प्रदान करके परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करके निजी भागीदारी में महत्वपूर्ण अनुभव की प्राप्ति हुई है।

रेविनिलि द्वारा प्राप्त किया गया अनुभव अद्वितीय है। भारतीय रेलवे के समक्ष चुनौती, अत्यधिक संतृप्त नेटवर्क पर शीघ्र क्षमता संवर्धन करने के लिए अनेक परियोजनाओं को त्वरित आधार पर पूरा करना है।

निर्माण गतिविधियों में कई गुणा वृद्धि तथा परियोजनाओं को कम समयावधि में पूरा करने की आवश्यकता को देखते हुए, रेविनिलि को क्षमता अवरोधों को दूर करने तथा परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। अभी तक प्राप्त अनुभव के आधार पर, रेविनिलि को भविष्य में निम्नलिखित भूमिकाएं निभाने की आवश्यकता होगी :-

  1. विभिन्न प्रकार की सार्वजनिक निजी भागीदारी के मॉडल पर रेल अवसंरचना परियोजनाओं को वाणिज्यिक आधार पर क्रियान्वित किया जाना।
  2. रेविनिलि स्वर्णिम चतुर्भुज पर क्षमता सृजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और उत्तर दक्षिण, पूर्व पश्चिम, पूर्व तटीय माल गलियारों आदि पर किए गए अध्ययनों के निष्कर्ष़ों के रूप में परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ करेगी।
  3. रेविनिलि को काफी बड़ी रेल विद्युतीकरण परियोजनाओं का कार्य सौपा जाएगा।
  4. रेविनिलि बड़े पुलों का निर्माण कार्य प्रारंभ करेगी। ऐसे पुलों पर बहुपक्षीय निधियों का निवेश आसानी से किया जा सकता है क्योंकि इनमें आर एंड आर का मुद्धा शामिल नहीं होता।
  5. एडीबी और विश्व बैंक जैसी बहुपक्षीय निधियों से परियोजनाएं पूरी की जाएंगी।
  6. विभिन्न मॉडलों के माध्यम से सार्वजनिक निजी भागीदारी द्वारा परियोजनाएं पूरी की जाएंगी।
  7. प्रतिवर्ष लगभग 1000 कि.मी. रेलपथ का निर्माण।
  8. प्रति वर्ष लगभग 3,000 करोड़ रूपये का व्यय।
  9. मंत्रिमंडल के अनुमोदन के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 की धारा-3 (32 ख) के तहत रेल प्रशासन के रूप में रेविनिलि का पूर्ण संचालन।
  10. रेल निर्माण में विश्व स्तर की निर्माण प्रोद्यौगिकी को लाने, उत्तम गुणवत्ता प्रदान करने तथा परियोजना की जीवट आयु लागत को कम करने के लिए किफायती डिजाइन एवं निर्माण कार्य करने में।
  11. महत्वपूर्ण रेल विकास गतिविधियों, जिनमें नई दक्षता एवं तकनीक की आवश्यकता होगी, का कार्य सौपा जाना।