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पृष्ठभूमि

भारतीय रेल नेटवर्क का विशेष रूप से उच्च घनत्व नेटवर्क, जो दिल्ली, कोलकात्ता, चेन्नई और मुंबई जैसे चार महानगरों एवं इनकी भुजाओं को जोड़ता है, काफी संतृप्त हो चुका है। उच्च आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने की चुनौती को पूरा करने के लिए भारतीय रेलों पर और अधिक क्षमता विकास की रणनीति तैयार किए जाने की आवश्यकता है। इस प्रकार की रणनीति की रूपरेखा तैयार करने हेतु हमें केवल रेलों के बजटीय संसाधनों और आंतरिक अधिशेष से अपनी निर्भरता को परिवर्तित करके प्राइवेट सेक्टर, बैंक, वित्तीय संस्थानों, बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय एजेंसियों जैसे वित्तीय संस्थानों से इक्विटी और शृण के माध्यम से गैर-बजटीय संसाधनों की व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है। परंपरागत स्रोतों से उपलब्ध वित्तीय संसाधन आवश्यकताओं को पूरा करने में बिल्कुल अपर्याप्त साबित हुए है। इसलिए रेल मंत्रालय परियोजना वितरण और परिसंपत्तियों के सृजन हेतु विभिन्न नवाचारी तरीकों पर विचार कर रहा है। दूसरा, योजना के परियोजना मॉडल से कार्यक्रम मॉडल को समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित करने के लिए रूपरेखा में परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता थी। यह महसूस किया गया कि रेलों को देश के आर्थिक विकास में पिछड़ने के बजाय भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता का सृजन करके आर्थिक विकास को गति प्रदान करना चाहिए। वित्तीय संवरण की स्थापित प्रक्रिया को अपनाकर और आधुनिक परियोजना प्रबंधन तकनीक का उपयोग करके परियोजनाओं को तीव्र गति से पूरे किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए पर्याप्त और निरंतर धन का मिलते रहना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए विभिन्न प्रकार की कई निर्माण मशीनों और उपकरणों और एक साथ अलग-अलग किस्म के स्किल सेटों सहित निर्माण कार्य को भी यांत्रिकृत किए जाने की आवश्यकता है। उपर्युक्त विचार प्रक्रिया और नीति के परिणामस्वरूप रेविनिलि की स्थापना की गई।