​​​​​​​​​​​​​​​​​​ अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

प्र1. रेलवे परियोजनाओं में कौन भाग ले सकता है?

उ1. इसमें निम्नलिखित भाग ले सकते हैं,

  • डिजाइन, निर्माण, वित्त, स्वयं और हस्तांतरण रियायत (बीओटी)।
  • केवल रियायत अवधि के दौरान भावी आवधिक पहुंच प्रभारका शुद्ध वर्तमान मूल्य बोली पैरामीटर होगा।
  • ऋणदाताओं को पर्याप्त सुविधा देने के लिए, पहुंच प्रभार रेलवे, परियोजना प्रायोजकों और ऋणदाताओं के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत एस्क्रो खाते में जाएगा।
  • पहुंच प्रभार की अग्रिम प्राप्ति के लिए डेवलपर को जल्‍दी कंपलीशन (समापन) के लिए इंसेंटिव।
  • भारतीय रेलों द्वारा शुरू किए जाने के बाद, परिसंपत्तियों का परिचालन और रखरखाव।
  • बीओटी रियायत में पट्टे के सभी कर लाभ का फायदा उठाया जा सकता है
  • पट्टे की तरह रियायत में हस्‍तांतरण एक मुद्दा नहीं है।

प्र3. रेल परियोजनाओं में निजी निवेश के संयुक्त उद्यम एसपीवी मॉडल के विवरण क्या हैं?

उ3. जेवी एसपीवी की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • उचित रियायतों के माध्यम से रेल अवसंरचना के विकास और निर्माण में अवसंरचना के लिए राष्ट्रीय स्तर के वित्त पोषण संस्थानों के अलावा हितधारकों और लाभार्थियों की भागीदारी की योजना बनाना।
  • एसपीवी में वित्तीय भागीदारी इक्विटी भागीदारी के माध्यम से हो सकती है। एक एसपीवी रेलवे और बहुसंख्‍य/ अल्पसंख्य भागीदार के साथ एक संयुक्त उद्यम या एक शुद्ध निजी कंपनी हो सकती है।
  • एसपीवी द्वारा राजस्व प्रभाजन के माध्यम से परिचालन से राजस्व अर्जित किया जाता है।
  • रियायत की अवधि आमतौर पर 33 साल होगी जिसे परस्‍पर सहमति से बढ़ाया जा सकता है।
  • परियोजना के लिए जरूरी यथा उपलब्‍ध रेल भूमि को पट्टे/लाइसेंस पर उपलब्ध कराया जाएगा।
  • रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधान के अनुसार शुल्क फ्रीडम।
  • कानून और सार्वजनिक नीति के तहत अनुमेय के अनुसार रेल भूमि का वाणिज्यिक उपयोग, वाणिज्यिक प्रचार अधिकारों को लाभ शेयरिंग के आधार पर अनुमति दी जाएगी।
  • परियोजना लागत, भूमि अधिग्रहण, अन्य परियोजना घटक अपेक्षाओं, और परियोजना व्यवहार्यता निर्धारित करने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा प्रारंभिक परियोजना विकास किया जाएगा।
  • भागीदारी वाली परियोजनाओं के लिए भारतीय रेलवे द्वारा भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।
  • एसपीवी द्वारा परियोजना निर्माण का निर्णय लिया जाएगा (मॉडल शेयरधारक समझौते के अनुसार आरवीएनएल द्वारा किया गया)।
  • आमान परिवर्तन और दोहरीकरण परियोजनाओं के मामले में, परियोजना लाइन का रखरखाव भारतीय रेलवे द्वारा किया जाएगा।
  • हरित क्षेत्र की परियोजना का रखरखाव का निर्धारण एसपीवी द्वारा किया जा सकता है
  • आमतौर पर परिचालन भारतीय रेलवे द्वारा अपने चल स्‍टॉक से किया जाएगा। समर्पित गैर-भारे रोलिंग स्टॉक के उपयोग की अनुमति है

प्र4. रेलवे द्वारा जेवी एसपीवी के रूप में लागू की जाने वाली परियोजनाएं कौन सी हैं?

उ4. निम्नलिखित परियोजनाएं हैं:

  • पिपावाव रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PRCL) ने पिपावाव बंदरगाह को बीजी रेल संपर्क प्रदान करने के लिए 350 करोड़ रुपये की लागत पर सुरेन्द्र नगर - पिपावाव आमान परिवर्तन परियोजना (264 किमी) कार्यान्वित की है। 198 करोड़ रु. की इक्विटी में रेल मंत्रालय और गुजरात पिपावाव पोर्ट लिमिटेड द्वारा समान भागीदारी की गई है।
  • हसन मैंगलोर रेल डेवलपमेंट कंपनी (HMRDC) ने मैंगलोर बंदरगाह को 150 करोड़ रुपये की लागत पर बीजी रेल संपर्क प्रदान करने के लिए हसन-मैंगलोर आमान परिवर्तन परियोजना (193 किमी) कार्यान्वित की है। 110 करोड़ रुपये की इक्विटी में रेल मंत्रालय और कर्नाटक सरकार द्वारा 45-45 करोड़ रुपये और न्यू मैंगलोर पोर्ट ट्रस्ट और मिनरल एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 10-10 करोड़ रु. की भागीदारी की गई है।
  • कच्छ रेलवे कंपनी लिमिटेड (केआरसी) कांडला और मुंद्रा के बंदरगाह को अपेक्षाकृत छोटे मार्ग द्वारा भीतरी इलाकों से जोड़ने के लिए बीजी रेल संपर्क प्रदान करने के लिए 453 करोड़ रुपये की लागत पर गांधीधाम-पालनपुर आमान परिवर्तन परियोजना (301 किमी) कार्यान्वित कर रहा है। 200 करोड़ रुपये की इक्विटी में रेल विकास निगम लिमिटेड की 100 करोड़ रुपये, कांडला पोर्ट ट्रस्ट की 52 करोड़ रुपये, गुजरात अदानी पोर्ट लिमिटेड की 40 करोड़ रुपये और गुजरात सरकार की 8 करोड़ रुपये की भागीदारी है।

हरिदासपुर पारादीप रेलवे कंपनी लिमिटेड पूर्व तट रेलवे पर 735 करोड़ रुपये की लागत पर हरिदासपुर-पारादीप नई रेल लाइन परियोजना (82 किमी) को कार्यान्वित कर रहा है। इस परियोजना में 275 करोड़ रुपये की इक्विटी के निम्‍नलिखित भागीदार हैं:

  • भागीदार के नाम

    IDCO(ओडिसा सरकार)

    पारादीप पोर्ट ट्रस्‍ट

    एस्‍सल माइनिंग एंड इंडस्‍ट्रीज लि.

    रुंगटा माइन्‍स लिमिटेड

    जिंदल स्‍टील एंड पावर लि.

    स्‍टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड

    POSCO इंडिया प्रा. लि.

  • MSPL लि.
  • कृष्णापटनम रेलवे कंपनी लिमिटेड हॉसपेट / बेल्लारी में लौह अयस्क बेल्ट को पोर्ट संपर्क प्रदान करने के लिए दक्षिण मध्य रेलवे पर ओबुलावरिपल्ले से कृष्णापट्टनम तक नई रेलवे लाइन परियोजना (111 किमी) को कार्यान्वित कर रहा है। परियोजना की लागत 733 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में 270 करोड़ रुपये की इक्विटी के निम्‍नलिखित भागीदार हैं:
  • भागीदार के नाम

    रेल विकास निगम लिमिटेड

    आंध्र प्रदेश सरकार

    एनएमडीसी लिमिटेड

    कृष्णापटनम पोर्ट कंपनी लि.

    ब्रम्हानी इंडस्ट्रीज लिमिटेड

    भरूच दाहेज रेलवे कंपनी लिमिटेड, पश्चिम रेलवे पर समनी के रास्‍ते भरूच से दाहेज तक (62 किमी) लंबी वर्तमान छोटी लाइन का बड़ी लाइन में आमान परिवर्तन की परियोजना को 201 करोड़ रुपये की लागत पर कार्यान्वित कर रही है। इस परियोजना में 95 रुपये की इक्विटी के निम्‍नलिखित भागीदार हैं:

  • भागीदार के नाम

    रेल विकास निगम लिमिटेड

    गुजरात मैरिटाइम बोर्ड

    अदानी पेट्रोनेट (दाहेज) पोर्ट प्रा. लि.

    दाहेज सेज लि.

    GNFC लिमिटेड

    हिंडालको इंडस्ट्रीटज लि. (इकाई: बिरला कॉपर)

    जिंदल रेल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड